सलमान खान की पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी 1988 सोशल मीडिया के दौर से पहले कैसे दिखते थे अखबारों में विज्ञापन

Rate this post

सलमान खान की पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी 1988 सोशल मीडिया के दौर से पहले कैसे दिखते थे अखबारों में विज्ञापन

 

 

Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan
Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan

 

 

 

आज के दौर में किसी फिल्म का प्रमोशन इंस्टाग्राम यूट्यूब और एक्स के जरिए करोड़ों लोगों तक मिनट में पहुंच जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज से 37 साल पहले जब सलमान खान ने बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा था तब फिल्में कैसे प्रमोट होती थी?

 

 

आज मेरे पास 1988 का एक दुर्लभ अखबार है जिसमें सलमान खान की पहली फिल्म बीवी हो तो ऐसी का विज्ञापन है जिसमें उसे समय की फिल्मी खबरें छपी हैं चलिए पुरानी यादों के पन्नों को पलटते हैं।

 

 

1988 का वो दौर जब सलमान भाईजान का सफर शुरू हुआ – 22 अगस्त 1988 को जब फिल्म बीवी हो तो ऐसी रिलीज हुई तब सलमान खान मुख्य अभिनेता नहीं थे बल्कि रेखा और फारुख शेख मुख्य अभिनेता थे इस फिल्म में सलमान खान सेकंड लीड रोल में थे 15 /9/1988 के  इस अखबार की कतरन में आप देख सकते हैं कि उसे समय फिल्मों की विज्ञापनों का अंदाज कितना सादगी भरा था ।

 

 

ब्लैक एंड व्हाइट- उसे समय के अखबारों में रंगीन फोटो बहुत कम होती थी लेकिन अखबारों में फिल्मों का विज्ञापनों को पढ़ने का पाठकों में गहरी रुचि होती थी कुछ पाठक अखबारों में आए फिल्मों के विज्ञापनों की तस्वीरों को अपने घर की दीवारों पर तक सजा लेते थे जिस घर की दीवारें बेहद आकर्षक लगने लगती थी।

 

 

हस्तलिखित फोंट्स – उसे दौर में आज की तरह डिजिटल पोस्टर नहीं होते थे बल्कि हाथ से बने स्केच या साधारण तस्वीरों का इस्तेमाल होता था।

 

Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan
Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan

 

 

 

सोशल मीडिया बनाम 1988 का अखबार – आज हम फिल्में देखने से पहले IMDB रेटिंग या ट्रेलर के व्यूज अपने मोबाइल फोन से सोशल मीडिया पर आसानी से देख लेते हैं लेकिन 1988 में वर्ल्ड माउथ (world of mouth) यानी लोग एक दूसरे से पूछ कर फिल्म देखना जाते थे एक दूसरे से फिल्म के बारे में जानकारी हासिल करते थे की फिल्म कैसी है और लोग खुद ही एक दूसरे को प्रत्यक्ष रिव्यू दिया करते थे यह एक बहुत ही रोचक तरीका होता था जिसे दर्शकों की रुचि फिल्म देखने के लिए स्वत: ही जागती थी।

 

 

अखबार के रिव्यू:- फ़िल्म क्रिटिक्स के कलम ही यह तय करते थे की फिल्म हिट होगी या फ्लॉप होगी उसे दौर में अखबारों का सबसे अधिक महत्व होता था फिल्मों पर अलग से विशेष अंग लेख लिखे जाते थे जो पाठकों और दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होते थे जो लोग कम पढ़े लिखे होते थे वह अखबारों में छवि फिल्मों के विज्ञापनों और तस्वीरों को देखकर फिल्म देखने जाया करते थे।

 

 

रेडियो का क्रेज-: पुराने समय में रेडियो संचार का सबसे बड़ा प्रमुख माध्यम था लोग रेडियो में गाने सुना करती थी बिना का गीत माला जैसे शो में गानों की लोकप्रियता से फिल्म का अंदाजा लगाया जा सकता था लोग गाने सुनकर यह अंदाजा लगाते थे कि यह फिल्म हिट है या फ्लॉप है या फिल्म की कहानी अच्छी है या बुरी है।

 

 

 

Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan
Salman Khan ki pahali Film biwi ho to aesi 1988 social media ke Daur se pahle kaise dikhte the akhbaron mein vigyapan

 

 

सलमान खान का डेब्यू: कुछ अनसुने तथ्य – 1.इस पुराने अखबार को पढ़ते हुए कुछ दिलचस्प बातें सामने आती हैं सलमान खान ने इस फिल्म के लिए खुद ऑडिशन दिया था वह भी एक आम कलाकार की तरह पेस आकर अपनी पहचान छुपा कर निर्माता से काम मांगने गए थे जब पहली फिल्म साइन करने का समय आया तो निर्माता निर्देशक के होश उड़ गए क्योंकि एग्रीमेंट में सलमान खान ने अपना पता सलीम खान के घर का पता दिया था जब निर्माता ने सलमान खान से पूछा कि यह तो सलीम खान के घर का पता है क्या तुम भी वहीं कहीं उसी अपार्टमेंट में रहते हो तो सलमान खान ने जवाब दिया हां सलीम खान मेरे पिता है तब निर्माता निर्देशक के होश उड़ गए थे और सलीम खान साहब को फोन करके बताया कि आपका बेटा सलमान हमारी फिल्में काम कर रहा है।

 

 

2.सलमान खान की आवाज को इस फिल्म में किसी और ने डब किया था उनकी ओरिजिनल आवाज इस फिल्म में नहीं थी।

 

3. अखबार के विज्ञापनों में उनका नाम सबसे नीचे या सहायक कलाकार के रूप में छापा करता था या उनका नाम ही नहीं हुआ करता था जबकि आज वह पूरी फिल्म के पोस्टर पर अकेले छाए रहते हैं।

 

 

निष्कर्ष – यह 1988 का अखबार सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है बल्कि भारतीय सिनेमा के एक बहुत बड़े मेगास्टार के जन्म का गवाह है सोशल मीडिया के बिना भी उसे दूर की फिल्मों में एक अलग ही रूहानियत और सादगी थी।

 

 

 

आपकी राय- क्या आपने फिल्म बीवी हो तो ऐसी अच्छी है आपको सलमान खान का उसे समय का लुक कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अगर आपके पास भी ऐसी कोई पुरानी याद है तो हमसे शेयर जरूर करें। सलमान खान से जुड़ी सभी अपडेट्स पानी के लिए बने रहिए आपके अपने न्यूज़ ब्लॉग बॉलीवुड यात्रा पर जहां आपको मिलती है सलमान खान से जुड़ी हर अपडेट सबसे तेज।यदि आप हमें किसी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं या फिर आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप हमें ईमेल Bollywoodyatraa@gmail.com पर भेज सकते हैं।

Prabhat

प्रभात उमंग एक लेखक है उन्होंने सहायक लेखक के तौर पर दैनिक स्वदेश ,नव स्वदेश, और स्वदेश ज्योति न्यूज पेपर में अपनी सेवाएं 10 वर्षो तक दी है प्रभात इंडियन स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन मुंबई के सदस्य भी हैं

View all posts by Prabhat

Leave a comment

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now