स्विच ऑन स्विच ऑफ मूव एक्टिंग मैथंड क्या है? Learn Camera Acting Online Switch On – Switch Off Acting Method Professional Course

Rate this post

स्विच ऑन स्विच ऑफ मूव एक्टिंग मैथंड क्या है?
Learn Camera Acting Online Switch On – Switch Off Acting Method Professional Course

 

 

स्विच ऑन स्विच ऑफ मूव एक्टिंग मैथंड क्या है? Learn Camera Acting Online Switch On - Switch Off Acting Method kya hai (Professional Course)
Learn Camera Acting Online Switch On – Switch Off Acting Method kya hai (Professional Course)

 

 

 

Learn Camera Acting Online” और “Switch On – Switch Off Acting Method”- यानी एक्शन मोड में आना एक्टर को अपने अंदर डाल लो यह एक आर्टिस्ट के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है आप थोड़ी बहुत एक्टिंग कर लोगे थोड़ा बहुत नेचुरल कर लोगे थोड़ा सा कैरेक्टर में जाओगे कट होगा और निकल जाओगे लेकिन कई बार ऑडियंस कनेक्ट नहीं हो पाती कई सींस ऐसे भी हैं जिसमें आप कनेक्ट करके रन भी लगते हों फिल्म देखते समय एक्टर दुखी होता है तो आप भी दुखी होते हो क्योंकि आप उसे स्टोरी से अटैच हो जाते हो।

 

उदाहरण-एमएस धोनी फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत वर्ल्ड कप जीते हैं तो उनके कोच रोने लगता है तब आप भी उसे सीन्स से कनेक्ट हो जाते हो बॉलीवुड में ऐसे बहुत सारे सीन्स है आप जब अंदर से फील करते हो तभी आपके चेहरे पर आता है बॉडी लैंग्वेज पर आता है और ऑडियंस कन्वेंस हो जाती है।

 

 

पंकज त्रिपाठी जी ने एक इंटरव्यू में बोल भी था कि अगर आप दुखी हो तो आप बॉडी लैंग्वेज से सिर झुका लोगे यही दिखाओगे।

 

 

आपने एक नई कार खरीदी है और आप रियल जिंदगी में बहुत खुश हैं रियल में आप बहुत खुश है आपने कार खरीदी और आप सेट पर आ गए। अब आपको कैमरे के सामने एक किरदार प्ले करना है जिसमें कैरेक्टर की कुर्की हो गई है दुनिया उजड़ गई है वह रोड पर आ गया है बर्बाद हो गया है उसके घर में किसी की मौत हो गई है मैं भीतर से बहुत गहरे सदमे में है आपको यह प्ले करना है अब आप बॉडी लैंग्वेज से कैरेक्टर को दिखाने की कोशिश करोगी लेकिन अंदर से आपको फील नहीं आ रहा है आप उस कैरेक्टर को फील नहीं कर रहे हैं तो आपके चेहरे के हाव-भाव में वह नहीं आएगा और कैमरा यह पकड़ लेगा ऑडियंस आपसे कनेक्ट नहीं होगी इसका मतलब यह नहीं है कि आपको रियल में दिखेगा नहीं। आपको बस करैक्टर के अंदर से थोड़ा सा फील करना है। अपना कैरेक्टर भी जोड़ना है कि अगर मैं दुखी होता तो कैसा होता आपके अपना कैरक्टर प्ले करना पड़ेगा स्विच ऑन स्विच ऑफ।

 

 

 

Learn Camera Acting Online Switch On - Switch Off Acting Method kya hai Professional Course
Learn Camera Acting Online Switch On – Switch Off Acting Method kya hai Professional Course

 

 

 

Example- जैसे हम घर में दाखिल होते हैं पंखा चालू करते हैं तभी पंखा घूमता है लेकिन पंखे को कनेक्शन एडजस्ट करता है दिया सप्लाई से कनेक्ट कर दिया ऊपर पंखा लगा दिया प्रोसेस हो गया । एक पंखा आप मार्केट से खरीद कर लाते हैं और पूरी प्रक्रिया करते हैं किस चीज के लिए जब आपको जरूरत होगी आप बटन चालू करोगे तो पंखा घूमने लगेगा आपको हवा देने लगेगा पर जब आप बंद करोगे तो पंखा बंद हो जाएगा।

 

 

 

ठीक उसी तरह एक्टर के पास भी यह चीज होती है कि वह एक्टिंग सीख ले एक्टिंग करना आने लगे अच्छे से कर पाए फिर उसको कॉस्ट्यूम मिलेंगे , उसको फिल्म का एक पूरा सेट मिलेगा, आर्टिस्ट मिलेंगे सब कुछ सेट पर उपलब्ध होगा लेकिन जैसे ही आप अपनी कॉस्ट्यूम पहनोगे वह कॉस्ट्यूम आपकी इलेक्ट्रिसिटी हो गई जो कैरेक्टर आपको प्ले करना है चोर पुलिस मेजर डॉक्टर पंडित आदि का तो आपको यूनिफॉर्म पहनी हैं लेकिन आपको एक्ट तब तक नहीं करना जब तक की डायरेक्टर आपसे बोले नहीं पंखा लगा हुआ है पंखा को चालू करोगे तभी वह घूमने चालू करेगा तो आप सारे साधनों के साथ सेट पर हैं आपने स्क्रिप्ट रीडिंग कर ली डायलॉग याद कर लिए आप रेडी हैं जैसे ही बटन चालू होगा आपको तुरंत वहां बोलना है।

 

 

डायरेक्टर बताएगा डायलॉग तेज बोलना है ,धीरे बोलना है ,रोना है ,इमोशनल सीन करना है की तरह स्विच मोड में ऑन रहो जैसे ही डायरेक्ट बोल एक्शन उसके थोड़ा सा पहले आप अपने कैरेक्टर में जाने के लिए रेडी हो जाओ डायरेक्टर भी सूट शुरू करने से पहले लाइट कैमरा रोलिंग और एक्शन बोलता है उसके पास 10 सेकंड पहले ही आप अपने कैरेक्टर में जाने के लिए रेडी हो जाएं।

 

 

Example- रणवीर सिंह ने अभी हाल ही में फिल्म धुरंधर में काम किया है 3 साल में रणवीर सिंह ने एक ही फिल्म की है कैरेक्टर को समझा, गहराई से समझा फिल्म में आलिया भट्ट और रणबीर हुड्डा को के बीच फिल्म में ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी क्योंकि किडनैपर थे।

 

 

स्विच ऑन स्विच ऑफ करैक्टर- जैसे ही स्विच ऑन किया पंखे का वह पंखा चलने लगा आप अपना कैरेक्टर प्ले करना चालू कर दो कट हुआ तो थोड़ा सा टाइम लेकर आप कैरेक्टर से बाहर आ जाओ रिलैक्स हो जाओ और अपना मूड चेंज कर लो। और यदि आपका intense सीन लंबा चलना ही है तो आप उसे मूड में रहो लेकिन ऐसा ना रहो कि वह कैरेक्टर आपकी रियल लाइफ में घुसने लगे मसलन अपने गैंगस्टर का कैरेक्टर प्ले किया कातिल का कैरेक्टर किया लेकिन आपकी पर्सनैलिटी एकदम अलग है आप एकदम शांत और हंसमुख है तो यह नहीं है की कट होने के बाद, एक्शन खत्म होने के बाद सीन खत्म होने के बाद, सेट से जाने के बाद भी उसे कैरेक्टर को आप अपने साथ में ले जा रहे हो और रोड पर लड़ने लगे हो या कुछ और बर्ताव करने लगे हो यह नहीं करना है।

 

 

हर कैरेक्टर आपके अंदर कुछ कुछ लेता है तो कुछ देता भी है जब आप कोई कैरेक्टर करते हो तो वह आपके अंदर से कुछ चीज निकलता है कुछ चीज आपकी डेवलप करता है और कुछ अच्छी चीज भी आपको सीखने को देता है और कुछ चीज आपसे ले भी लेता है तो स्विच ऑफ होने के बाद आप उसको भूल जाइए और अपना काम करें क्योंकि अगले दिन हो सकता है आपको कुछ और करना पड़े अगले दिन दूसरा नये तरह का कैरेक्टर प्ले करना पड़े सम कैरेक्टर कैरी करने तो नहीं जाएंगे ना स्विच ऑन स्विच ऑफ होना बहुत जरूरी है।

 

 

बहुत सारे एक्टर इंटेंस कैरेक्टर करते रहते हैं कैरेक्टर से बाहर नहीं निकाल पाते तब क्या होता है उनकी निजी जिंदगी में समस्या उत्पन्न होने लगती है।

 

 

Example- रणवीर सिंह ने एक इंटरव्यू में बोल भी था संजय लीला भंसाली की फिल्म में खिलजी का किरदार उन्होंने निभाया था उनका बहुत ही इंटेंस कैरेक्टर था नेगेटिव रोल था तो उसे कंप्लीट करने के बाद रणवीर सिंह को उसे कैरेक्टर से निकलने में बहुत टाइम लगा। फिल्म इंडस्ट्री में और बड़े-बड़े कुछ एक्टर ऐसे भी हैं जैसे इरफान खान मनोज बाजपेई यह फटाफट किरदार में जाते हैं और काम खत्म होने के बाद तुरंत बाहर आ जाते हैं अब मनोज बाजपेई एक्सपर्ट हो चुके हैं स्विच ऑन स्विच ऑफ कैरेक्टर प्ले करने में वह मास्टर्स है।

 

 

Example- रणवीर सिंह ने धुरंधर में बहुत अच्छा कैरेक्टर प्ले किया लेकिन उन्होंने वह ऐसे नहीं किया फर्स्ट धुरंधर फिल्म में साइलेंट किरदार था जैसा उनके डायरेक्टर ने बोला हो वह अपने कैरेक्टर में रहे हैं अंडर कवर एजेंट का किरदार निभाया अंडर कवर काम कर रहे हैं तो साइलेंट रहे तो कैरेक्टर में जा रहे हो तो फटाफट स्विच ऑन हो जाओ फटाफट रेडी हो रहा हो कैरेक्टर प्ले करो काम कंप्लीट हो जाए तो आप कैरेक्टर से तुरंत बाहर निकल जाओ आप कैरेक्टर में घुसे रह गए तो आप डिप्रेशन में चले जाओगे और पागल हो सकते हो रियल लाइफ में उसे बाहर आ जाओ उसे हमेशा फील न करने लगो आप एक नॉर्मल इंसान हो।

 

 

Example- रणबीर कपूर का एनिमल फिल्म में जैसा किरदार था यदि आप सच में कैरेक्टर में बने रहोगे तो आप किसी भी व्यक्ति को करने लगोगे बोलोगे मैं तो बादशाह हूं तो रियल वर्ड अलग है और रियल वर्ड अलग है सेट कैमरे के सामने बार-बार रीटेक होते हैं वहां आपको पनिश नहीं किया जाएगा क्योंकि आपको और बाकी सभी को मालूम है यह सच नहीं है नकली है। मेंटली प्रिपेयर होकर आप डिप्ली कैरेक्टर में जा रहे हो और आप बाहर नहीं आए तो यह वार्निंग भी है और जरूरी भी है।

 

 

Example-अगर हम बहुत पीछे जाते हैं तो महाभारत में अर्जुन थे उन्हें चक्रव्यूह की रचना करना आता था अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु ने अपनी मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह में जाने की विद्या सीख ली थी लेकिन जब वह युद्ध लड़ने गए बोला कि मैं चला जाऊंगा चक्रव्यूह में उन्होंने युद्ध में चक्रव्यूह की रचना की लेकिन बाहर आने की विधि अभिमन्यु को नहीं पता थी और वह वीरगति को प्राप्त हो गए थे ठीक इसी तरह आपको कैरेक्टर में जाना है तो आपको कैरेक्टर से बाहर भी आना ,आना चाहिए। बहुत बड़ी जटिल प्रक्रिया नहीं है एक नॉर्मल आदमी के लिए कैरेक्टर प्ले करना बड़ी बात भी हो सकती है और बहुत छोटी बात भी हो सकती है।

 

 

Example- आप एक नॉर्मल शांत व्यक्ति हो आप बड़ी फैमिली से हो आप गाली नहीं बकते आप वेजिटेरियन हो सिंपल तरीके से रहते हो कभी भी लड़ाई झगड़ा नहीं देखी आपने लेकिन मन को कैरेक्टर आपको गब्बर सिंह जैसा करना है जो लड़ रहा है मार रहा है नॉनवेज खा रहा है एकदम नकारात्मक किरदार आपको निभाने को कहा जाएगा एक कलाकार की असली पहचान सही परख इसी से होगी कि एक डिफरेंट किरदार करना और उसे किरदार से बाहर भी आना ।आपको अपने जीवन में कैरेक्टर की नकारात्मक चीज नहीं रखता ह है उसे बाहर निकलना है।

 

 

रॉकस्टार रणबीर कपूर की फिल्म थी इस फिल्म में रणबीर कपूर ने किरदार को निभाने के लिए बहुत मेहनत की थी फिल्म के डिमांड की हिसाब से जिस किरदार को फिल्म में उन्होंने निभाया है उसे किरदार को पहले समझा भी है उसे जगह को समझा कैसे बात करते हैं कैसे कपड़े पहनते हैं वहां का वातावरण वहां के मार्केट में रणबीर कपूर घूमे उन चीजों को समझे रॉकस्टार जैसा फील दिखाया और फिल्म रॉकस्टार रणबीर कपूर के करियर की एक बेहतरीन फिल्म बन गई। रणबीर कपूर उसे किरदार से बाहर निकले हैं किरदार से बाहर निकलना भी जरूरी होता है।

 

 

परेश रावल भी पहले निगेटिव करेक्टर करते थे फिर कॉमेडी करने लगी तो आपको भी टाइप कास्ट बनना है यदि आप टाइप कास्ट हो जाते हैं तो बेस्ट करने लगते हैं।

 

 

मुंबई में ऐसे ढेर सारी संस्थान है जहां स्विच ऑन स्विच ऑफ मेथड सिखाया जाता है तो आपको यह आना बहुत जरूरी है इस मेथड पर आपको पर बहुत सारी किताबें भी मिल जाएंगे तो आप तैयारी कीजिए सीखिए की कैरेक्टर में जाना है और बाहर आना है।

 

 

थिएटर में तो लाइव लगातार एक्ट करना होता है कैमरे के सामने ऐसा नहीं होता है कैमरे के सामने बार-बार कट होता है बार-बार आपको कैरेक्टर में जाना होता है कट के बाद आप मस्ती मजाक करने लगे फिर रियल कैरेक्टर में आ गए सामने वाले विलेन को आप फिल्म या टीवी सीरियल में जान से मारना चाहते हो लेकिन जैसे ही कट होगा आप दोस्त बन सकते हो ।

 

हम आपको को अपने अगले लेख में बताएंगे कि कैरेक्टर बिल्ड अप कैसे करना है उसका स्टेटस कैसे समझाना है उसमें जाना कैसे हैं।

 

 

ऑडिशन की लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए आप Bollywood Yatraa के WhatsApp channel से नीचे दिए गए आइकन पर क्लिक करके जुड़ सकते हैं

 

 

 

बॉलीवुड में करियर बनाने को लेकर अभिनय के क्षेत्र में काम करने को लेकर आपके मन में कोई सवाल है तो आप हमसे बेझिझक कमेंट करके पूछ सकते हैं हम अगले 24 घंटे के अंदर आपके सभी सवालों के जवाब जरूर देंगे। तों संभावनाएं आपका इंतजार कर रही है तैयारी करें Join Bollywood और मुंबई के लिए निकले। आप हिम्मत ना हारे आप अपनी मंजिल जरूर पायेंगे।

 

 

Prabhat

प्रभात उमंग एक लेखक है उन्होंने सहायक लेखक के तौर पर दैनिक स्वदेश ,नव स्वदेश, और स्वदेश ज्योति न्यूज पेपर में अपनी सेवाएं 10 वर्षो तक दी है प्रभात इंडियन स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन मुंबई के सदस्य भी हैं

View all posts by Prabhat

Leave a comment

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Translate »